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सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन एवं तुलसी भवन द्वारा संस्थान के मुख्य सभागार में “युवा रचनाकार” नामक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति प्रोत्साहित करना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के न्यासी श्री अरुण कुमार तिवारी ने की, जबकि संचालन सुश्री पुनम महानंद ने किया। स्वागत एवं विषय प्रवेश मानद महासचिव डॉ. प्रसेनजित तिवारी ने किया, तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री प्रकाश मेहता ने किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं श्रीमती माधवी उपाध्याय के मधुर स्वर में सरस्वती वंदना से हुआ।इस कार्यक्रम में नगर के 21 विद्यालयों से 150 छात्र-छात्राएं, उनके शिक्षकगण एवं शहर के प्रसिद्ध साहित्यकार शामिल हुए।कार्यक्रम को विभिन्न सत्रों में विभाजित किया गया था। काव्य सत्र के विशेषज्ञ श्री शेषनाथ सिंह ‘शरद’ तथा समन्वयक श्री ब्रजेन्द्रनाथ मिश्र थे। कथा सत्र के विशेषज्ञ साहित्य समिति तुलसी भवन के भाषाविद्, पुरातत्वविद् एवं साहित्यकार श्री दिव्येन्दु त्रिपाठी तथा समन्वयक वसंत जमशेदपुरी थे। पत्रकारिता सत्र के विशेषज्ञ स्थानीय हिन्दी दैनिक ‘प्रभात खबर’ के वरिष्ठ सम्पादक श्री संजय मिश्र तथा समन्वयक श्री सुरेश चन्द्र झा थे।कार्यक्रम के अंतिम सत्र में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने अपनी स्वरचित रचनाओं का पाठ किया। इसके बाद सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। उनके शिक्षक-शिक्षिकाओं को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुभाष चन्द्र मुनका, राम नन्दन प्रसाद, विमल जालान, डॉ. यमुना तिवारी ‘व्यथित’, डॉ. अजय कुमार ओझा, डॉ. रागिनी भूषण, अरुणा भूषण शास्त्री, माधवी उपाध्याय, दिव्येन्दु त्रिपाठी, रीना सिन्हा, डॉ. संजय पाठक ‘सनेही’, अशोक पाठक ‘स्नेही’, डॉ. उदय प्रताप हयात, अजय प्रजापति, मनोकामना सिंह ‘अजय’, बलविन्दर सिंह सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।अंत में संस्थान के उपाध्यक्ष श्री राम नन्दन प्रसाद ने सभी का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का महत्व:

यह कार्यशाला युवा पीढ़ी को हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस कार्यशाला के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मकता को विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से हिंदी भाषा एवं साहित्य के विकास में योगदान देगा।


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