जमशेदपुर, शहर में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर जमशेदपुर अक्षेस के प्रति सख्स रुख अपनाया है। न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय एवं न्यायाधीश दीपक रौशन की खंडपीठ ने अक्षेस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले कुछ अवैध निर्माण को ध्वस्त करके दिखाएं, उसके बाद ही आगे की बातचीत होगी।
राकेश झा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट द्वारा गठित अधिवक्ता आयोग के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता आर एन सहाय ने अपनी दूसरी रिपोर्ट अदालत में पेश की, इस रिपोर्ट में शहर में फैले अवैध निर्माण के जाल और अक्षेस की लापरवाही का विस्तृत विवरण दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण किया जा रहे हैं और अक्षेस केअधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
अक्षेस के दावों की खुली पोल
अक्षेस के अधिवक्ता ने दावा किया कि 46 अवैध भवनों को सील कर दिया गया है इस पर अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूछा कि कितनी अवैध निर्माण को वास्तव में ध्वस्त किया गया है, अदालत ने कहा कि अक्षेस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट महज दिखावा है और इसमें 2011 में सील किए गए भवनों की सूची को ही दोहराया गया है जबकि हकीकत में इन भवनों में सीलिंग हटा ली गई है और एक भी अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया गया है।
कमीशन की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अदालत ने अक्षेस के अधिवक्ता से कहा कि बेसमेंट में पार्किंग और कमर्शियल कंपलेक्स बनाने की बात तो सुनी है लेकिन बेसमेंट में किचन बनाने की बात कभी नहीं सुनी, अदालत सेंटर पॉइंट होटल में हुए अवध निर्माण का उदाहरण देते हुए यह टिप्पणी कर रही थी, इस पर अक्षेस के अधिवक्ता ने   कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, सुखी  चूकिं कमीशन ने सोमवार को ही अपनी रिपोर्ट पेश की है इसलिए अदालत ने कहा कि वह रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करना चाहेगी, इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को निर्धारित की गई है, अदालत ने अक्षेस को चेतावनी देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक ठोस कार्रवाई करके दिखाएं वरना सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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