जमशेदपुर में आंध्र प्रेदेश की झलक देखने को मिली है । तेलुगू समाज के लोग अपने रीति रिवाजों के साथ माता नोकालम्मा की पूजा अर्चना की है । नव वर्ष के एक दिन पहले यह पूजा की जाती है । आज तेलुगू समाज का नव वर्ष है और इससे पहले तीन दिनों तक वे आंध्र प्रेदश की रीति रिवाजों के साथ माता नोकालम्मा की पूजा करते है । इस पूजा में झांकी स्वरूप माता के सात रूप दर्शाये गये , जिसे देखने के लिये श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी । इस पूजा में माता से चेचक बीमारी से दूर रहने की मन्नते मांगी जाती है । इसके साथ साथ घर परिवार सुखी सम्पन्न रहे इसके लिये माता की आराधना की जाती है । तीन दिनों तक चलने वाली इस पूजा में पहले दिन तेलुगू समाज के लोग मंदिर परिसर में इमली पेड़ की पूजा की । ऐसा मान्यता है कि माता का निवास इसी ईमली पेड़ में है , जिससे भक्तों ने ईमली के पड़ को हल्दी व कुमकुम लगाकर हल्दी पानी व नीम के पत्ते से अभिषेक किया । साथ ही अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना की । फिर माता नोकालम्मा की पूजा अर्चना की गयी । इसके बाद दो दिनों तक यज्ञ की पूर्णहुति की गयी । भंडारा का आयोजन किया गया । अंतिम दिन टीन प्लेट आंध्र क्लब से महिलायें सिर पर कलश लेकर बारीडीह पूजा मैदान पहुंची जहां आंध्र प्रदेश की तरह ही विधि विधान के साथ पूजा को संपन्न किया गया ।

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आपको बता दे कि जमशेदपुर में यह पूजा 1954 से तेलुगू समाज के लोग करते आ रहे है । पूरे विधान विधान से साथ पूजा अर्चना की जाती है । माता के 9 रूप में से एक रूप की पूजा की जाती है । आंध्र प्रदेश की तरह पूजा रीति रिवाज पर पूजा कमेटी के लोग बताते है कि ऐसा इसलिये किया जाता है कि ताकि जमशेदपुर में रहने वाले समाज के लोगों को यह ना लगे कि वे आंध्रा प्रदेश से बाहर है । आंध्र प्रदेश की तरह की उन्हें महसूस है , ऐसा माहौल देने का प्रयास किया जाता है । साथ ही समाज को एक साथ एक जुट रखने का प्रयास भी किया जाता है


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